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Channel: एक ज़िद्दी धुन
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दिनमान ने क्या नहीं छापा था जेएनयू की दलितों-पिछड़ों की हत्यारी प्रवेश-नीति...

Asrar Khan(असरार खान से परिचय फेसबुक के ज़रिये था और उनकी मौत की ख़बर भी आज सुबह फेसबुक से ही मिली। उनकी वॉल पर लाइक-कमेंट के लिहाज़ से रिश्ता नहीं के बराबर था लेकिन उनकी पोस्ट देखता था। वे हमेशा ज़ेहन...

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ऐसे बयान से क्या फ़ायदा

आलोक धन्वा कविता पढ़ने के लिए मंच पर आए तो उन्होंने शुरुआत वीरेन डंगवाल की इस कार्यक्रम में ग़ैर-मौज़ूदगी के ज़िक्र से की। जादुई अंदाज़-ओ-अदा से श्रोताओं को गिरफ़्त में ले लेने वाले आलोक ने कहा कि...

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नरेन्द्र जैन की कविताएँ

नरेंद्र जैन मेरे तईं नरेन्द्र जैन हिन्दी कविता के चित्तप्रसाद हैं क्योंकि उनकी कविता का विजुअल कॉन्टेंट वैसा ही सुस्पष्ट है और इम्पैक्ट उतना ही मर्मभेदी. उनकी कविता पढ़ना पिछले पचास सालों में  हिन्दी...

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अशोक वाजपेयी को संस्कृति का मसीहा कोई मूर्ख ही कहेगा - भैरव प्रसाद गुप्त

भैरव प्रसाद गुप्त (वर्तमान साहित्य, अगस्त-90)(सुप्रसिद्ध कथाकार भैरव प्रसाद गुप्त से विद्याधर शुक्ल की बातचीत)भोपाल का भारत भवन अपने जन्म के साथ तमाम तरह के विवादों से ग्रस्त रहा। फोर्ड फाउंडेशन से...

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नामवर सिंह पर उर्मिलेश का ऐतिहासिक लेख

जेएनयू में नामवर सिंहः जैसा देखा, जैसा पाया-उर्मिलेश(समयांतरके नवंबर 2013 अंक में प्रकाशित) पिछले दिनों एक किताब आई है-‘जेएनयू में नामवर सिंह।’ इसे राजकमल प्रकाशन ने छापा है। संपादन किया है- जेएनयू की...

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मनुष्य और समाज की बेहतरी का ज्ञान-विज्ञान - शिवप्रसाद जोशी

(विज्ञान में विचार के नये आयाम)समीक्षा पुस्तकः ज्ञान, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और समाजः आम ज़बान में कुछ बातें लेखकः लाल्टूप्रकाशकः एकलव्यमूल्यः 200 रुपयेहिंदी कवि और प्रशिक्षण और पेशे से वैज्ञानिक लाल्टू...

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क्या अपमान से निपटने के लिए उग्रता के अलावा कोई रास्ता है?

समीक्षा निबंध: प्रसांता चक्रवर्तीरॉक्सेन एल. यूबेन. ड्रिवेन टु देयर नीज़: ह्यूमिलिएशन इन कॉन्टेंपोरेरी पॉलिटिक्स. (प्रिंसटन और ऑक्सफ़र्ड: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, 2025.)क्या अपमान और यातना के स्तर...

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मोहन मुक्त की कविताएँ

कवि मोहन मुक्तमेरा पहाड़ ?????मुंडा कोलगोंड नागबौद्ध द्रविड़या हडप्पन बाद केजो कोई भी थे मेरे पुरखेउन्होंने कभी नहीं कहा ....'मेरा पहाड़'कम से कम रिकॉर्ड तो यही बताते हैंअगर कहा भी होतो कैसे जानें उनकी...

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`किसी अनजान ढाणी` से एक खरी-बेचैन आवाज़

`बौने प्रहसन और अन्य कविताएं`कविता संग्रहप्रकाशक - न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन``एक आवाज़ आई ये देश महान हैमैंने ग़ौर से देखा तो सदियों सेरक्त पिपासु देवताओं की लाल जीभ के सिवायकुछ दिखाई नहीं दिया।बेशक ग़ौर...

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शाम के पृष्ठ पर एक असम्भव की तरफ़ खुलता कवि

अदनान कफ़ील दरवेश की कविता पर शिवप्रसाद जोशी अदनान,शाम के पृष्ठ पर एक असम्भव की तरफ़ खुलता है- उसकी यह काव्य-पंक्ति उसका परिचय है।अपने जीवन के तीसरे दशक में दाख़िल हो चुके अदनान कफ़ील दरवेश का यह तीसरा...

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विनोद कुमार शुक्ल की कविता पर अच्युतानंद मिश्र

विसंगति की विडंबना60’ के दशक में जिन कवियों ने विशिष्ट कहन शैली से अपनी पहचान निर्मित की, विनोद कुमार शुक्ल उन थोड़े कवियों में से हैं. कवि के साथ-साथ उनकी ख्याति एक चर्चित कथाकार की भी रही है. उनके...

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मृणाल सेन का संस्मरण: रात में फूल खिलते हैं, पानी मे बेलें फलती हैं

अगस्त 14-15, 1947. देश ने स्वतंत्रता की खुशियाँ मनाईं और विभाजन का मातम भी. एक ओर तो लोग अतीव आनंद की अवस्था में थे वहीं दूसरी ओर क्रोध और हताशा ने लाखों लोगों को चूर-चूर कर दिया था - पूर्वी बंगाल और...

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यहाँ मेरा घर बन रहा है (मोहन मुक्त के कविता संग्रहः “हिमालय दलित है” पर कुछ...

 वो तुम थे एक साधारण मनुष्य को सताने वालेअपने अपराध पर हँसे ठठाकर,और अपने आसपास जमा रखा मूर्खों का झुंड अच्छाई को बुराई से मिलाने के लिए, कि न छंट सके धुंध, बेशक हर कोई झुका तुम्हारे सामनेकसीदे पढ़े...

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एक सुबुक आवाज़ की फैलती स्याही

 (अदनान कफ़ील दरवेश की कविताओं पर कुछ बातें)शिवप्रसाद जोशी   XVWe, the mortals, touch the metals, the wind, the ocean shores, the stones, knowing they will go on, inert or burning, and I was...

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शैलेन्द्र के सवर्ण हिमायती: हुए तुम दोस्त जिस के दुश्मन उस का आसमां क्यूं हो

 "शैलेन्द्र को मैं हिन्दी फिल्मों का सबसे बड़ा गीतकार मानता हूँ। हिन्दी फिल्मों में गीत रचयिता के रूप में बहुत बड़े-बड़े नाम हैं जैसे- मजरूह, साहिर, कैफ़ी आज़मी और मख़्दूम के भी कुछ गीत हैं लेकिन शैलेन्द्र...

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पता नहीं चलता कि कब किस ने पाला बदल लिया है

प्रिय कवि लाल्टूका नया कविता संग्रह `कौन देखता है कौन दिखता` परिकल्पना प्रकाशन से छप कर आया है। इस संग्रह से कुछ कविताएँ यहाँ देते वक़्त इंटरनेट पर घूमते हुए प्रिय कवि नरेंद्र जैन की यह टिप्पणी मिली।...

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शिवप्रसाद जोशी की किताब `रिक्त स्थान और अन्य कविताएँ`

 शिवप्रसाद जोशी 1991 से कविताएँ लिख रहे हैं। 1947 के बँटवारे और व्यापक साम्प्रदायिक हिंसा के बाद गाँधी का क़त्ल कर अपनी ताक़त और मंशा का प्रदर्शन कर चुके जिन फ़ासिस्टों को सेकुलर लोकतांत्रिक नेताओ और...

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ट्रैजडी किंग और इंडियन सेकुलरिज़्म की ट्रैजडी : धीरेश सैनी

 दिलीप कुमार (11 दिसंबर, 1922-7 जुलाई, 2021) पर बात शुरू करते हुए एम. एस. सथ्यू की फ़िल्म `गर्म हवा`की बड़ी शिद्दत के साथ याद आ रही है। बँटवारे के पस-ए-मंज़र बनी इस फ़िल्म के मुख्य पात्र आगरे के एक...

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ज़िंदा नहीं रहने दिया गया था आम्बेडकर से प्रभावित तिलक के बेटे को

 (मशहूर बुद्धिजीवी सूरज येंगडेकी किताब `कास्ट मैटर्स` से लिया गया टुकड़ा जिसका हिन्दी अनुवाद भारत भूषण तिवारीने किया है।)जानकर हैरत होगी, ऐसे आम्बेडकर के एक और सहयोगी थे श्रीधरपंत तिलक जो रूढ़िवादी बाल...

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वाम आंदोलन में भी अपने ऊपर दबंग जातियों की शक्ति महसूस करते हैं दलित - सूरज...

नव-उदारवादी धज के पूँजीवाद ने जो वायदे किए थे उनमें से अधिकतर पूरे नहीं हुए बल्कि इसने भारत के सबसे अधिक हाशिए के लोगों की मृत्युसंख्या में वृद्धि ही की. 1980 के दशक में आया नव-उदारवादी कॉरपोरेट...

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